मैं सुखी हूं, फिर भी दुखी हूं
मैं असफल हूं ज़िंदगी में,
मैं फिर भी तो सुखी हूं।
देख लूं किसी को ऊँचाई छूते,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
कभी पैदल चला हूं मंज़िल की ओर,
बस के धक्कों में भी सुखी हूं।
देख लूं किसी को गाड़ी में बैठे,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
कपड़े मेरे सादे हैं, लेकिन साफ़,
संडे बाज़ार से ही सुखी हूं।
देख लूं किसी को ब्रांड में लिपटा,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
खुशबू से महक उठता है बदन मेरा,
कोबरा सेंट से ही सुखी हूं।
पर आ जाए किसी से डिओर की सुगंध,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
शरीर मेरा हल्का है, स्वस्थ हूं,
भूखा नहीं सोया — तो सुखी हूं।
देख लूं किसी को होटल में खाते,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
घर मेरा छोटा है, मगर उसमें प्यार है,
और अपनों के बीच मैं सुखी हूं।
देख लूं किसी की आलीशान हवेली,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
नाम मेरा ज़्यादा नहीं दुनिया में,
अपने सर्कल में ही सुखी हूं।
देख लूं किसी को शोहरत पाते,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
काम छोटा सही, पर चलता है,
सादे जीवन में भी सुखी हूं।
देख लूं किसी का ऊँचा ओहदा,
बस — इस बात को लेकर दुखी हूं।
ए खुदा! देख ले मेरे दिल के ज़ख्म को,
ग़म है ज़िंदगी में — फिर भी मैं सुखी हूं।
जो चाहिए जीने के लिए, सब मेरे पास है,
देख लेता हूं किसी को खुश — इसलिए दुखी हूं।
खुदा ने मुझको सब दिया,
जो जीने के लिए ज़रूरी है।
चीज़ों को बाँटना 'तेरा-मेरा' —
शायद ये मेरे 'मैं' की मज़बूरी है।
अहंकार को देख लिया अब,
हर छोटी चीज़ में सुखी हूं।
तुलना से जो ईर्ष्या पनपी,
बस — उस बात को लेकर दुखी हूं।