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प्रेम बंधन: अंजाना सा
दिल्ली की चकाचौंध भरी दुनिया में एक नाम सभी की जुबां पर था— शिव कपूर। एक प्रसिद्ध बिज़नेस टाइकून, जिसकी सफलता की कहानी जितनी चमकदार थी, उतनी ही गहराई से दर्द भरी भी।
शिव का बचपन किसी आम बच्चे की तरह नहीं बीता। जब वह महज़ छह साल का था, उसके माता-पिता एक यात्रा पर निकले थे। मौसम का मिज़ाज अचानक बदला, और आधी-तूफान में उनकी गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। शिव के माता-पिता की उसी क्षण मृत्यु हो गई।
शिव उस समय अपनी दादी मां के साथ घर पर ही था। जैसे ही दादी मां को ये दुखद समाचार मिला, उनका जीवन मानो थम गया। बहू-बेटे की मौत ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था, लेकिन अपने पोते के लिए उन्होंने जीने का फैसला किया।
वक़्त बीतता गया, शिव बड़ा हुआ, लेकिन उस हादसे की छाया उसके स्वभाव पर गहराई से छाई रही। वह शांत, गंभीर और आत्मनिष्ठ हो गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने अपने पारिवारिक व्यवसाय को पूरी निष्ठा से संभाला और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
लेकिन, हर गंभीर इंसान के जीवन में एक ऐसा व्यक्ति होता है जो उसके सन्नाटे को मुस्कान में बदल सके। राहुल, शिव का बचपन का दोस्त, या यूँ कहिए उसका भाई जैसा, उसकी जिंदगी का वही हिस्सा था।
जहाँ शिव शांत, गंभीर और अनुशासित था, वहीं राहुल मस्तमौला, ज़िंदादिल और जीवन को खुलकर जीने वाला इंसान था। उसकी हाइट 5 फीट 8 इंच, भूरे रंग की आंखें और चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट। वह शिव का सच्चा साथी था—चाहे ऑफिस का काम हो या उसका क्रोध संभालना।
शिव, जिसकी नीली आंखें किसी को भी खामोश कर देतीं, जिसकी उपस्थिति में लोग नज़रें झुका लेते थे, उसके जीवन में एक खालीपन था... एक अधूरा सा एहसास...."