बारिश और यादें
पता नहीं, ये बारिश और प्यार का नाता क्या है,
जब भी बरसती है, दिल के भीगे पन्ने खोल जाती है।
बारिश की हर बूँद, उसकी यादें ताज़ा कर जाती हैं,
उसके संग बिताए लम्हों को फिर से जगा जाती हैं।
उसके साथ की वो गरम चाय याद आती है,
वो हँसना, फिर हँसकर शर्माना भी याद आता है।
चाय की हर चुस्की में उसकी हँसी घुल जाती है,
उसकी वो नज़रें, फिर से दिल बहला जाती हैं।
कई बार सोचा, इन यादों को भूल जाऊँ,
पर हर बारिश में, वो फिर लौट आती हैं।
लगता है, जब तक ये बूंदें बरसती रहेंगी,
उसकी यादें भी मेरे साथ चलती रहेंगी।