मुक्त छंद
1 हमारी सरकारी नीतियाँ
एक दिन रायपुर के लाखेनगर की
एक काव्य गोष्ठी में,
एक अप्रत्याशित घटना घट गई।
जिसमें एक फटेहाल,
वरिष्ठ कवि की, चप्पल चोरी हो गई।
इस घटना से सभी कविगण
विचलित हो गए।
गरीब कवि की अस्मिता के प्रति
चिंतित हो गए।
थाने में पहुँचकर उन सब ने
रिपोर्ट लिखवाई।
जिसकी सूचना भी तुरंत,
विधायक महोदय को भिजवाई ।
सुनते ही विधायक ने,
एसपी को बुलाया।
और तुरंत ही
कार्रवाई का आदेश फरमाया।
अरे एसपी साहब,
यह हमारे देश की अस्मिता का सवाल है।
जैसे खिलाया किसी ने,
गाल फाड़ने वाला पान है।
कवि अपने घर का नहीं
राष्ट्र का हितचिंतक कहा जाता है।
आज भी इतिहास के,
पाठ्यक्रमों में यही दुहराया जाता है।
एसपी साहब,
वह जब कविता लिखेगा,
तब क्या इस घटना का,
उल्लेख नहीं करेगा?
कि हमारे समाज में
चोरों की भी स्थिति बड़ी दयनीय थी।
घिसी पिटी चप्पल चुराना भी
उस चोर की मजबूरी थी।
इससे हमारे विकास शील
इतिहास पर बुरा असर पड़ेगा।
आने वाला कल,
हमारी सरकार की बुराई करेगा।
अतः चोर के नाम
एक अपील जारी कर दी जाए।
बेचारे कवि की घिसी पिटी चप्पल
तुरंत लौटा दी जाए।
और बदले में उस चोर को
नई चप्पल दिलवाई जाए।।
मनोज कुमार शुक्ल *मनोज*