मुश्किल है तय करना.....(ग़ज़ल)
रात ख़ूबसूरत है या चाँद, मुश्किल है तय करना,
दिल की बातें हैं या ख़्वाब, मुश्किल है तय करना।
हर तारे की रोशनी में, एक प्यारा सा नग़मा है,
तेरी याद है या तेरा साया मुश्किल है तय करना।
चाँद की चाँदनी में, दिल की बेताबी बसती है,
हर लम्हा तुझसे मिलने की आरज़ू है तय करना।
अभि तेरे बिना ये रातें भी, एक अधूरी कहानी हैं,
हकीक़त की दुनिया में साथ मुश्किल है तय करना
रात का हर पहलू, तेरे बिना वीरान सा लगता है,
दिल की हर धड़कन, तुझसे मिलने को तरसता है।
अभि इस अंधेरे में भी, तेरी यादें रोशन करती हैं,
रात ख़ूबसूरत है क्योंकि, साथ है जीवन तय करना