क्या सोच रहा है...?
कब तक सोचेगा...?
सोचते सोचते कर देता है शाम,
कि क्या करना है... ?
रोज मंजिल को पाने के सपने सजाता है,
करता कुछ नहीं
अर्न्तमन में ख्याली पुलाव पकाता है,
क्या सोच रहा है...?
कब तक सोचेगा ...?
कुछ सोचा है करने का,
फिर डरता क्यो है...?
पाना है उसे
फिर रुकता क्यों है...?
आज भी तुने सोचा कुछ करने करने का..
फिर उसे भुल गया,
क्या सामर्थ्य नहीं है तुझमें,
कुछ करने का
क्या सोच रहा है...?
कब तक सोचेगा...?
आज सोचते सोचते तेरे मन एक विचार आता है,
कुछ करने का तेरे अन्दर जुनून आता है,
देखता है तु दूसरे को कुछ करता हुआ,
खुद को छोड़कर तू उनके जैसा काम करने जाता है
होता तेरे से कुछ नहीं
फिर तू खुद को अकेला पाता है,
आता है फिर वापस तू वहां पर....
फिर सोचता है करना क्या है...?
फिर क्या सोच रहा है...?
कब तक सोचेगा...?
सोचते सोचते तु कुछ कर नहीं पाया
जहां देखा तूने खुदको
वहां असफल हीं पाया..
सोचते सोचते ढल गई है उम्र तेरी..
क्या सोच रहा है...?
कब तक सोचेगा...?
पूछना चाहूंगा विजय तुझ से
सवाल मैं
कुछ करेगा भी
या केवल सोचता रहेगा
- : विजय गोठवाल