बेशक दिल में चाहत हो कितनी भी,
वक़्त की धूल में यादें खो जाती हैं।
हर चाहत को मुक़द्दर नहीं मिलता,
लोग चाहकर भी अक्सर भुल जाते हैं।
कभी हालात मजबूरी बन जाते हैं,
कभी दूरियाँ दिल से पार हो जाती हैं।
वो प्यार के पल जो थे कभी हमारे,
आज बस ख़्वाबों में सिमट कर रह जाते हैं।
ख्वाबों की ताबीरें हर किसी को नहीं मिलती,
इश्क़ की राहें अक्सर जुदा हो जाती हैं।
जो बातें दिल में दफ़्न होती हैं गहरी,
वक़्त के साथ वो भी धुंधली हो जाती हैं।
यादें तो होती हैं दिल का एक कोना,
पर हालात के साथ वो भी मुरझा जाती हैं।
चाहकर लोग भुल क्यों जाते हैं,
ये सवाल अब तक जवाब नहीं पाते हैं।