धीरे धीरे बरसेगा पानी
धूप से झुलसी धरती, प्यासी है बहुत,
बादल आए है घिरकर, छाने लगे आकाश सब,
धीरे धीरे बरसेगा पानी, निस्तब्धता होगी टूट,
झिलमिल से नदिया बहेगी सारी, खेत होंगे हरे भरे झू.
पक्षी गाएंगे मधुर गीत, फूल खिले होंगे रंग-बिरंगे,
महक फैलेगी सुगंधित, मन होगा मगन सबके,
किसान होंगे खुश बहुत, फसल होगी लहलहाती,
खुशहाली छायेगी चारों ओर, गरीबी होगी मिट्टी में दबती.
बूंदें पड़ेंगी एक एक करके, धरती को सींचेंगी प्यार से,
जीवन उमड़ेगा नया सब ओर, खुशियां छलकेंगी हर आंख में,
यह बरसात है वरदान, लेकर आती है सुख-समृद्धि,
प्रकृति का है यह रूप अद्भुत, देखकर मन हो जाता है शांत और निरमल.