मै राजनीति का तंत्र नही,
मै ख्वाहिशो वाला मंत्र नही,
मै वीर हु इस माटी का,
मै रक्षक हु उस घाटी का,
मै बंद कमरे की बात नही ,
मै धडकन लाखो दिलकी हु,
मै भगतसिंह की शक्ति हु,
मै तुलसी की भक्ति हु ,
मै देश प्रेम, मै बलिदान ,
मै एकता, का मोती हु ,
मै चाह आजादी की हु,
मै राह आबादी की हु ,
मै वीरो की ललकार हु ,
मै यथोचित हुंकार हु ,
मै शब्द आजादी हु,
मै कर्म शहादत हु,
मै बेटा, भारत माता का ,
मै रक्षक इस देश का ,
मै रूद्र रुप हु शंकर का ,
मै प्रेम रुप हु क्रष्ण का ,
मै यौवन, मै जीवन हु,
मै सबसे सुंदर चित्र हु,
मै शांति कायम करने वाला,
सुनो मधुर एक गीत हु,
मै लोगो से चलने वाला तंत्र हु,
मै ख्वाहिशो वाला मंत्र नही,
मै वीर हु इस माटी का,
मै रक्षक हु उस घाटी का,