महुआ मुगती नात री, उमर दराज अबदुल
मौका टोके गरज दिनी, चित्कारी अथुल
मोरे पिया खाजा जिया, दान पान व्यापार
दिन तारे धक दिया, मरदंग ताल संभार
रोटी बोटी दरष रही मासूम चिख्या विषराम
झूठन लहू बंदरंग दरिया, जमुना कलगाम
रामराज रस ना चखे, टकटकाई बस नैन
हरदिन मुरत मन मन्दिर, हटत नहीं यु चैन
मोबत झूत दिवासपन जोग, मोहू ना विषराम
जवानी दिवानी कामकाज, रोज यही संगराम