धोबी के घाट का वह कपड़ा है जिसे पछाड़ मार - मारकर धोया जाता है, रगड़ा जाता है, कसकर निचोड़ा जाता है और फिर कड़ी धूप में सुखाया जाता है और ………. अंततः
वह निखरकर सामने आता है ।
ज़िंदगी भी उसी कपड़े की तरह है । यदि इसे निखारना है तो कठिन परिस्थितियों से डरें नहीं बल्कि उनका सामना करें ।