बिटिया प्यारी नन्ही सी, राजदुलारी मुन्नी सी। आंखो मे उमग भरे हुए सपने सजाए सच्चे से। फूलो के जैसे महकती रहती ,कोयल के जैसे चहकती रहती। अब बिटीया हो गई जवान माँ-बाप के निकलते रहते प्राण। बिटिया का ख्याल माँ-बाप को करता है बेहाल। बिटिया है घर की लाज ,बिटिया है परिवार का मान । करके माँ-बाप की इच्छा को स्वीकार, बिटिया ने बढा दी कुल की शान। बेटी होने का हर फर्ज निभाया । बिटिया ने बेटी होने का कर्ज चुकाया।