चल मिलते है अपनी जगह.....
चल आ जाना वक्त पर मिलने अपनी जगह,
कुछ याद है या भूल गई वो अपनी जगह।
जहा चलते चलते बुने थे सपने हमने अपने,
याद है ना हाथमें हाथ लेकर चलते थे अपनी जगह।
वो तेरा योग, तेरी मुस्कान ,तेरा प्यार
वो तेरा घूरना, चलना,इकरार अपनी जगह।
वो मेरा तस्वीर लेना वो तेरा इतराना,
दुनियाभर से दूर एक दूसरेंमे गुम होजाना अपनी जगह।
वो छोटे छोटे फूल और खुशबू तेरी सासों की,
वो दीवार पर नाम 'राज' उखरा अपनी जगह।
भरत (राज)