*सुप्रभात*
🙏🙏
*जिहि अंचल दीपक धरयो, हन्यो सो ताही गात।*
*‘रहिमन’ असमय के परे, मित्र शत्रु ह्वै जात॥*
*अर्थात्*
रहीम जी कहते हैं कि साड़ी के जिस अंचल से दीपक को छिपाकर एक स्त्री पवन से उसकी रक्षा करती है, दीपक उसी अंचल को जला डालता है अर्थात *जब बुरे दिन आते हैं, तो मित्र भी शत्रु हो जाता है।*
*शुभ दिन*
🌹🌹