कौन
सोच इतनी गहरी , तो जड जड़ो से काटेगा कौन,
भारत की बेटी को लहू लोहान कर टांगा है कौन,
राजनीति की रोटी सेकने देखो आया नेता कौन,
बात होगी न्याय, सम्मान की पर भरोसा देगा कौन,
आज तक शोषितों का शोषण करते ये इंशान कौन, दलितो,शोषितो आपका वोट खरीदने देखो आया कौन,
हाथ पीले करने की तम्मना लिए देखो बैठा है कौन,
उजाड़ दी कोक माँ की जिसने वो कसाई कौन,
सुनी ममता की कोक को,किलकरियो से भरेगा कौन,
पर्दे के आगे की कहानी देखी पीछे की दिखायेगा कौन,
हाथ-पैर मुह बंदी है शर्म की हथकड़ियाँ खोलेगा कौन,
उसके दुल्हन का ड्रेस उसकी अर्थी पर पहनाये कौन,
हाथ- पैर खोलकर, दुल्हन का जोडा पहनकर,
है हिम्मत मुखाग्नि देने की, नही तो मुखाग्नि देगा कौन,
भरत माली (राज)