पापा एक तुम होते तो क्या बात होती,
बैठा रहता हु ऑफिस की घूमती हुई कुर्सी मे, साफ सुधरे काच से सजे ऑफिस मे, एक तुम होते तो बया अपना गर्व करता। कह पाता अपने सुख दुःख को, महसूस कर पाता आप के जज्बातो को, भागीदार बनता आप के पागलपन का, जिंदगी लौट आती फिर से एक बार पटरी पर।
कई लोग आये मेरी जिंदगी मे, बहुतो से प्यार मिला बेशुमार लेकिन नही मिला तो सिर्फ तुम्हारा निश्चल प्रेम।
काश तुम्हारा छाया होता सर पर,तो शायद जीवन कुछ और होता, जीवन भी एक गुलदस्ता लगाता। अब तुम्हारी कमी मुझे बहुत खलती है।
अब मै सिर्फ शांत रहता हु।
सुनो ना पापा, मै इस दुनिया मे अकेला महसूस करता हु, कही से आकर बस एक बार गले से लगा दो ना पापा। दिल रुदन करता है तुम्हारे नही होने से
पापा एक तुम होते तो क्या बात होती।
मिस यू पापा
भरत (राज) 🖤