मेरी वफा का ये कया सिला दिया तुमने,
मेने कया चाहा था और कया दिया तुमने !
हालत पे अपनी अब तो हमको भी तरस आने लगा ,
हाल ये कैसा मेरा बेहाल किया है तमने !
कोई दिन भी ना गुजरा तुम्हारी याद बैगर ,
खुदा को ना किया तुमने याद किया हमने !
तुम्हारा नाम कभी हमने अपनी जबा से ना लिया ,
और जहा भर मे अनिल को रुसवा किया है तुमने !
अनिल नादान