अहसास
आज सारा दिन ऑफिस में काम करते हुए अपना दायित्व का निर्वहन करते हुए सुमन अभी बैठी जी थी कि मौसमी आ गई ।
मौसमी बोली ... "मैडम जी आज मुझे जल्दी जाना है"।
सुमन मैडम..."क्यों अब आज कौन सी दिक्कत आ गई भाई रोज रोज ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती।आए दिन कुछ न कुछ होता रहता है ।घर परिवार ही संभालो या नौकरी ही कर लो"।
मौसमी..."मैडम जी आज मेरी बेटी का जन्मदिन है और मुझे जाना है । मैं अपने बच्चे को दुखी नहीं कर सकती ।सारा दिन नहीं तो, कुछ समय तो उसके नाम कर ही सकती हूं।मैडम जी आपके भी तो बच्चे होंगे आप भी तो उनके साथ समय बिताती होंगी । मैं जा रही हूं"
मै कुछ कह पाती की मौसमी ने अपना बैग उठाया और चली गई।
मै सोच में पड़ गई जब निखिल का जन्मदिन था तब उसने कहा था मम्मी जल्दी घर आ जाना।
लेकिन मेरा जबाव था मेरी मीटिंग है, पापा है न तुम दोनों उनके साथ चले जाना और निखिल को रोता हुए छोड़कर चली आई थी और ऑफिस में व्यस्त हो गई ...
आज मन को बड़ी पीड़ा हो रही है मौसमी की बात सुनकर वो अपने बच्चे के प्रति ईमानदार है और मैं...काम को महत्व देती हूं।
जतिन ने मुझे कितना समझाया लेकिन उसकी बात हमेशा अनसुनी करती रही।आज अहसास हो रहा है।
अब रुका नहीं जा रहा।ऐसा लग रहा है पंख होते तो जल्दी ही घर पहुंच जाती।
घर पहुंचकर बेल बजाती रही बाद में नजर पड़ी तो पता चल ताला लटक रहा है ।
जतिन को फोन किया पता चला पास के है पार्क में है ।जतिन को कुछ बोला नहीं ..और चुपचाप पार्क पहुंच गई और देखा दोनों बच्चे जतिन के साथ खेल में व्यस्त है।
अपने आपको रोक नहीं पाई और उनके सामने पहुंच गई बच्चे दौड़कर गले लग गए मम्मी आप हमारे साथ खेलोगी ।हमें रोना आ गया आज लग रहा था पहली बार प्यार से गले लगकर अपनापन का अहसास हो रहा।
जतिन ये देखकर आश्चर्यचकित हो देख रहे है।
हमने बस इतना ही कहा..." जतिन आज मुझे अपने कर्तव्य का अहसास हुआ है।मुझे माफ़ कर दो"।
जतिन ने कहा.."सुबह का भूला अगर शाम को घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते ।
डॉ.भावना शुक्ल