लोग अपने सपने पूरा करने के लिए कितनी महेनत करते हैं, फिर भी उनके सपने टूट जाते हैं ये नहीं की वो महेनत नहीं करते हैं, बल्की उनके सपनों को जो बड़े लोग होते हैं वो पैसा लेकर मार देते हैं , "बात कड़वी हैं पर सच हैं" जो लोग कुछ महेनत नहीं करते हैं वो पैसे देकर अपने सपने पूरे करते हैं, पर जो बहुत महेनत करता हैं उनके साथ जो बड़े लोग बैठे हैं वो गलत करते हैं, उनकी महेनत नहीं देखते हैं ना की उनके महेनत कदर करते हैं, सिर्फ पैसा देखते हैं, ऐसा तो बहुत जगह पे हुआ हैं और हो रहा हैं, बहुत लोग फेल हो जाते हैं फिर भी वो महेनत करते हैं अपने सपने पूरा करने के लिए, मुझे अब्दुल कलाम सर की एक बात बहुत याद आती हैं, फेल का मतलब होता हैं "फर्स्ट अटेम्प्ट लर्निंग" , लोग फेल हो जाते हैं फिर निराश हो जाते हैं, फेल होने का ये मतलब नहीं हैं की आप ज़िन्दगी से हार गए हो.
कभी हार न माने: जब जीवन में असफलताओ का सामना करना पड़ता हैं, तो कलाम सर हार न मानने की सलाह देते है , बल्की इस विफलता को सफलता में बदलने के लिए और भी अधिक महेनत करने की सलाह देते हैं, उनका मानना है कि असफलता और सफलता साथ-साथ चलती है, असफलताओ का सामने किए बिना व्यक्ति सफलता प्राप्त नहीं कर सकता हैं...
शायर " हर्ष "