कबीर दास जी के दोहे
तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पांवन तर होय ,
कबहुँ उड़ी आँखीन पड़े, तो पिर घनेरि होय।।
साहेब बंदगी 🙏
भावार्थ - कबीर दास जी कहते हैं कि हमारे पांव के नीचे छोटा सा तिनका दबा हुआ रहता हैं हमें कभी उसकी निन्दा नहीं करनी चाहिए , क्योंकि यदि वह छोटा सा तिनका उड़ कर हमारे आंखों में आ जाए तो अत्याधिक पीड़ा का कारण बन जाता हैं। अर्थात् इस दुनियां में अगर छोटी सी छोटी चीज भी सही जगह में पहुंच गया तो हमारे लिए बहुत संकट पैदा कर सकता हैं। इसीलिए हमें किसी की भी निंदा नहीं करनी चाहिए चाहे वह छोटा हों या बड़ा।