सुबह और शाम की तरह
बदलता रहता हैं
सुख दुःख का मौसम
खिड़कियों पर बैठे बैठे - दुःख
आँखें जलाना तुम्हारें इंतजार में
आसमान का रंग बदल ते हुए
देखना कुछ घंटे सफ़ेद
बाकी समय काला घनघोर
कोई बात नहीं
ख़ुदा ने ज़िंदा तो रखा
तुम्हें याद करने के लिए -सुख
निक राजपूत