औरत.....नमक है जीवन का ।।
औरत.... स्वाद है अपनेपन का ।
औरत... ख्वाहिसो का गुब्बारा है।।
औरत... सहारा हे बिछड़े हुओ का ।
औरत.... मर्द की लहरों का किनारा है।
औरत.... बच्चों के पैरों की जमीं है।।
औरत... संभालना जानती है तोड़ना भी।
औरत... जुकना जानती है और जुकाना भी।।
अपने आगोश में सब को समा सकती है ।
इसीलिए वो भगवान की मूरत में तराशी गई हैं।।