कहने को यूँ तो बहुत कुछ है
लेकिन बाकी सब ठीक है
कुछ बेबसी है तुम बिन
कुछ मजबूरियाँ हैं तुम बिन
हों अपने,या गैर
सब एक से हैं
यहाँ धोखे हैं तुम बिन
वहाँ रुसवाईयाँ हैं तुम बिन
बाकी सब ठीक है
समय की चोट से
दो हिस्सों में बँट गयां हैं
अब तेरा मन मेरा मन
एक तरफ शोर बहुत है
तुम बिन
एक तरफ खामोशियां है
तुम बिन
बाकी सब ठीक है
~paakhi