प्यास -
प्यास आग हैं जो जूनून का
जज्बा बुझने की बात दूर खुद को डुबोती इंसान डूबता जाता अपने ही अश्क से प्यास बुझाता फिर भी प्यासा रह जाता।।
मरने के बाद भी दूँनिया
कहती प्यास होगा प्यास आश है प्यास आग है प्यास पीड़ा का एहसास।।
प्यास जज्बा जुनून प्यास आगे बढ़ने कि होड़ है प्यास जरूरी हैं प्यास जगाना जीवन कि मजबूरी है ।।
अब नही तो चाह नही चाह नही तो राह नही प्यास परिवर्तन कि धारा है प्यास कहे तो माया भी प्यास प्रतिस्पर्धा प्रतिद्वंद्वी का करती निर्माण प्यास जीवन का संघर्ष ।।
प्यास पराक्रम को परिभाषा देता प्यास जीत हार का स्वाद प्यास उद्देश्यों का आयाम अध्याय प्यास आमंत्रण देता जीवन का संग्राम।।
प्यास कभी ना बुझने दो प्यास सदा ही जगने दो प्यास नही तो जीवन निर्थक असहाय प्यास वीरोचित गाथा कि पृष्ठभूमि प्यास से ही उद्भव उत्सव जीवन का अभिमान।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।