विगलांगता -
विगलांगता अभिशाप नही जीवन का संग्राम दिव्य व्यक्ति दिव्यांग आंखे नही फिर भी कृष्ण भक्ति का सूरदास युग प्रेरणा मार्ग।।
समाज राष्ट्र पर बोझ नही राष्ट्र समाज के कर्णधार पल प्रहर हर चुनौती को दर करता दर किनार।।
लड़ता जीवन कुरुक्षेत्र का कर्मयोगी कर्मयोद्धा विकृति मानसिकता को देता मात।।
विगलांगता चाहत नही ईश्वर का ही निर्माण विगलांगता शर्म की नही बात ।।
अपमान तुच्छ अभिशाप नहीं विगलांग मानव मानवता का मूल्यवान धरोहर मौलिक मुल्यों आचरण कि व्यवहारिक मानवता अभिमान।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर।।