सुनो मैं तुमसे सिर्फ प्यार नहीं चाहती
तुम्हारा गुस्सा भी चाहती हूँ
मैं नहीं चाहती तुम मेरी हाँ में हाँ करो
मैं तुमसे बहस करना भी चाहती हूँ
तुम मेरे नखरे झेलना
मैं तुम्हारी अकड़ संभालना भी चाहती हूँ
मैं चाहती हूँ तुम मना लो मुझे
मैं हक़ से तुमसे रूठना भी चाहती हूँ
जो तुमको महसूस हो
मैं वो अहसास बनना भी चाहती हूँ
मैं अपनी हस्ती, दिल, रूह सब तुमपे मिटा दूँ
मैं तुम्हारे वजूद का हिस्सा होना भी चाहती हूँ....😇