ऐसा क्या है जो इतना भाए मुझे
कोई तो कुछ बता के जाए मुझे,
डालूँ नज़रें जिधर तेरा है जलवा
ख़्वाब भी बस तेरा ही आए मुझे,
ऐसा क्या ख़ास है सनम तुझमें
करके दीवाना यूँ जो जाए मुझे,
ग़म अकेला तेरा ही काफ़ी है
दे के अब दूसरा ना जाए मुझे,
हाल क्या मैंने कर लिया अपना
कोई इतना अब ना रुलाए मुझे,
खो दिया सब तेरी तमन्ना में मैंने
इश्क़ का पाठ तो ना पढ़ाए मुझे,
ज़िक्र से तेरे घर मेरा महक उठे
ख़ुशबू दीवाना करके जाए मुझे,
एक पहेली है जान तू सच मुच
कोई बूझे और फ़िर बताए मुझे,
आम हो कर जो ख़ास है इतना
दोस्त कैसे ना फ़िर वो भाए मुझे,
जान मेरी है ये जा बसी है तुझमें
कब हुआ ये कोई तो बताए मुझे,