सामान्य तौर पर हम प्राय खाने के रूटिंन और भोजन की क्वालिटी एंव ग्रेविटि को लेकर लापरवाह के साथ-साथ असहज रहते हैं. इसका प्रमुख कारण हमार सोच पर चौतरफा बाजारवाद का हावी, कुछ कुछ या बहुत कुछ लाईफ स्टाईल और नांइसाफी का दौर, दवा आदि सब रेडीटूईट के साथ हंकमंक है. हमारे चारों ओर की व्यवस्था और आधा अधूरा ज्ञान से परे विवेकपूर्ण जीवन आवश्यकभी है यह हमे समझना इस समय की सबमें बड़ी प्राथमिकता है । जीवन कभी सैटल नहीं होता है, समस्या शटल ही रहती है. नियमित अन्तराल से हर दौर में प्राप्त है. प्रायः हमें नेचर के साथ रहने की आदत होनी चाहिए हमें स्थानीय तौर पर उपलब्ध आहार का व्यवस्थित तरीके से ही सेवन करना चाहिए और रितु यानी मौसम के अनुसार आसान आधार पर रहन सहन और व्यवस्थित होने की आदत डालनी होगी यथा सर्दी में थोड़ा एनर्जी फूड और उष्णना काल में वह खाना ही खाये जो हमे ताजगी के साथ पेट को उचित ठण्डक भी दे यही खाना चाहिए स्थानीय तौर पर उपलब्ध जिसमें भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विरासत में बाजरी जो ज्वार मक्का चना मूंग मोठ आदि अनेक प्रकार के रितु की उपज सहज सुलभ यत्रतत्र सर्वत्र कराई है इन्हीं के ही नियमित और नियम अनुसार सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्त दिक्कतों से छुटकारा पाया जा सकता है ।
//कृपया प्रतिदिन आहार में जौ,ज्वार,मक्का,बाजरा,चना, मूंग और मोठ का ही दलिया व आटे की रोटी, राब-राबड़ी डोहे की राब-राबड़ी का सेवन करे और निरोगी काया रखें ।//
https://www.matrubharti.com/jugalkishoresharma WS +91- 9414416705