तुम तो नही हो , पर फिर क्यों तुम हो?
सुबह की पहली किरण में तुम हो।
फूलों से महके चमन में तुम हो
बादलो के पीछे नील गगन में तुम हो।
पंछियो की चहचाहट में तुम हो।
पत्तो की सरसराहट में तुम हो।
मेहकी हुई हवाओ की आहट में तुम हो।
तुम तो नही हो पर फिर क्यों तुम हो?
सर्दियों की धूप में तुम हो ।
गर्मियों की छाओ में तुम हो।
बसन्ती फिजाओ में तुम हो।
मेरे दिल की सदाओं में तुम हो।
समन्दर की लेहरो में तुम हो।
रात के चारो पहरो में तुम हो।
काली रात के अंधेरो में तुम हो।
उजले हुए सबेरो में तुम हो।
तुम तो नही हो.......
नादिया के पानी की कलकल में तुम हो।
ख्वाइशों की हलचल में तुम हो
रंग बिरंगी होली में तुम हो।
भीगे हुए साबन में तुम हो।
संगीत के हर साज में तुम हो।
गीत की हर आवाज में तुम हो।
श्रंगार रस के आग़ाज में तुम।
किसी दीवाने शायर के मिज़ाज में तुम हो।
तुम तो नही हो........
ख्वाबो के आशयानों में तुम हो।
यादो के शामयानों में तुम हो।
ख्यालो में तुम हो और अरमानो में तुम हो।
मय की फेहफिल सजी हो जहाँ उन मेहखानों में तुम हो।
मेरी ज़िन्दगी में तुम हो।
मेरी बंदगी में तुम हो।
मेरी आवारगी में तुम हो ।
मेरी संजीदगी में तुम हो।
तुम तो नही हो........
मेरे धर्म में तुम हो ।
मेरे ईमान में तुम हो।
गीता में तुम हो ।
रामायण में तुम हो।
मेरी इबादत में तुम हो ।
मेरी वगावत में तुम हो।
मेरी हँसी में तुम हो ।
मेरी आदत में तुम हो।
मेरी बदमाशी में तुम हो ।
मेरी सराफत में तुम हो।
मेरी अदा में तुम हो ।
मेरी नज़ाकत में तुम हो।
मेरे जिस्म की तपिस में तुम हो। और मेरी हरारत में तुम हो।
मेरे आदि में तुम हो ।
मेरे अंत में तुम हो।
सुनामी में तुम हो ।
क़यामत में तुम हो ।
तुम तो नही हो......
मेरी वफाओ में तुम हो।
मेरी ख़ताओं में तुम हो।
मुझे जो मिली हैं उन सज़ाओ में तुम हो।
बहारो में तुम हो ,नज़ारो में तुम ।
आसमान पर बिखरे चाँद तारो में तुम हो। बहते हुए दरिया के किनारो में तुम हो।
धरती की चारो दिशा में तुम हो।
नमाज़ -ऐ -फजर में तुम हो नमाज़ -ऐ -इशा में तुम हो।
डूवती हुई साँझ में तुम हो ।गहराती हुई निशा में तुम हो।
तुम तो नही हो........
मंदिर की घंटियों में तुम हो।
मस्ज़िद की अज़ानो में तुम हो।
जो ले जाये खुदा की तरफ उन निशानों में तुम हो।
प्रेम की आस्था में तुम हो।
मोहब्बत की दास्ताँ में तुम हो।
और क्या बताऊ कहा-कहा तुम हो।
मेरे लिए तो सारे जहाँ में तुम हो सारे जहाँ में तुम हो।
तुम तो नही हो ,पर फिर क्यों तुम हो।