Hindi Quote in Blog by Roopanjali singh parmar

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इंस्टाग्राम और दुनिया भर के ऐप में फिल्टर मिल जाते हैं, जिनसे हम ख़ूबसूरत लगते हैं।
काश कुछ ऐसे फिल्टर भी होते जो वास्तविक जीवन में उपयोग में आते।
जैसे, खुश होने का फिल्टर, अवसाद से भरी ज़िन्दगी में रंग भरने का फिल्टर, रात भर रो-रोकर सूज चुकी आंखों को सामान्य दिखाने का फिल्टर, और सबसे महत्वपूर्ण, झूठी हँसी छुपा वास्तव में मुस्कुराने का फिल्टर।

छोड़ो यार..

मेरा मन रात में समुन्दर किनारे जाने का होता है.. डूबने के लिए नहीं बस यूँ ही रेत पर नंगे पांव चलते हुए वही सो जाने के लिए।
मैं इस शहर से दूर, लोगों से दूर एक ऐसी जगह जाना चाहती हूँ जहाँ आंखों के नीचे आ चुके ये बदसूरत गड्ढे मेरी चुगली किसी से नहीं करे।
जहाँ मुझे किसी को भी अपना सिर ज़मीन की ओर लटका के लेटने की वज़ह नहीं बतानी पड़े।
जहाँ अंधेरा हो और मुझे रोशनी में आने की ज़रूरत न पड़े।

बहुत बार सोचा किसी मुर्दा से बात करूं.. उससे पूछना है कि मृत्यु होने के बाद ये रोते-चीखते लोग सुनाई आते हैं क्या..? फिर लगा अरे पागल खुद से कर ले। तू कौन सी ज़िंदा है।
ये खुश रहो, आगे बढ़ो के भाषण देने में, सुनने में बहुत बढ़िया लगते हैं.. मगर मानने में नहीं।
आधी रात को बड़ा मज़ेदार ख़्याल आता है मृत्यु के किसी बहुत सरल तरीके को खोजने का,, जिससे मर भी जाऊं और दर्द भी ना हो।
आपको लग रहा होगा कितनी डरपोक है, मौत भी आसान चाहती है।

मगर नहीं, डरपोक नहीं हूँ।
अपने आगे ख़ुशियों को तमाम होते देखा है मैंने, ना चल सकने वाली स्थिति में बेदम दौड़ी हूँ मैं। वो सब कुछ अपने कानो से सुना है मैंने, जिसे सुनकर मुझे मौत आ जानी चाहिए।
मगर देखो तुम्हारे सामने हूँ, साँसे ले रही हूँ।
मैं डरपोक नहीं हूँ।
..
बस लगता है कि लोग मेरी कहानी ना जान जाए।
झूठी या सच्ची.. जो भी हो मगर अपनी हमदर्दी,दया आप बचा के रखो खुद के लिए, मुझे नहीं चाहिए।
क्योंकि मेरे जीवन में दुःख बिल्कुल नहीं है , दुःख के बीच में अचानक जीवन आ जाता है और मुझे अब इसकी आदत है।
हाँ ये खुशी क्या बला है? तुम जानते होगे, मुझे नहीं पता।

और ये जो मेरी आँखें हैं ना.. ये सच्ची हैं,बहुत सच्ची।
इनमें झाँकोगे तो मेरी बे-लिबास पड़ी ज़िन्दगी देख लोगे।
ये तो मेरे साथ बहुत बुरा होगा।

ये बिल्कुल ऐसा है जैसे कक्षा के बीच, भूख से व्याकुल बच्चे का लंचबॉक्स खुलते ही टीचर जान जाती है नमकीन खाई या अचार-परांठा।

और बच्चा बस शर्मिंदगी से सर झुका लेता है।
-रूपकीबातें
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