गौतम देव जिसे अपने माता-पिता से और परिवार से बहुत ही प्रेम था पर एक दिन उन्होंने देखा कि एक निशपाप जीव को सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए मार कर खुद को शिकारी होने का दावा करता है। और फिर गौतमबुद्ध ने उस पक्षी की रक्षा की और उसकी जान बचाई।इस घटना के बाद गौतम देव बहुत ही गंभीर और बेचैन रहने लगे उनको उनके प्रश्न का उत्तर नहीं मिला तो वो एक दिन इसी सत्य की खोज करने निकल पड़े।
रास्ते में बहुत सारी अरचने आई।
फिर जब वो एक पेड़ के नीचे विश्राम करने बैठे तो देखा कि बहुत सारे लोग एक व्यक्ति को अपने कंधों पर लेकर जा रहे थे। गौतम देव ने सोचा कि ये सब कहा जा रहें हैं और फिर ये सब राम का नाम ले रहे हैं।।
एक मरे हुए आदमी को सब लेकर कहां जा रहे हैं?
और फिर सब को जाना होगा।। ये कैसा सम्भव है मैं कैसे रहुगा अपने प्रिय जन के बिना।।
#Budha