एक पत्र तुम्हें लिख दूँ
कि देश की हवा बदल रही
जनता शक्तिशाली हो रही है
भाषा निखर- संवर रही है
पहाड़ों पर मौसम सुहावना है
समुद्र उछल कूद कर रहा है
मन उल्लसित है।
मेरी इच्छा है
तुम्हारे संग और चलूँ,
रास्ते की झाड़ झंखाड़ हटा दूँ
तुम्हारी बातों में अपनी बात मिला दूँ।
कि मेरे सपने में तुम आ
स्नेह सिखाने बोलते हो
हाथ में हाथ दे
पुराना रिश्ता जोड़ते हो।
सपना एक एहसास लाता है
नक्षत्रों को बदल
आत्मा की एक परिधि बना
धीरे-धीरे लौटने लगता है।
* महेश रौतेला