कल सपनेमे एक झलक जिंदगीको देखा
वो राहोपे मेरी मुस्करा रही थी,
फिर ढूंढा उसे इधर उधर
वो आंख मिचौली कर मुस्करा रही थी,
एक अरसे के बाद मुझे करार आया
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनो क्युँ खफा है एक दुसरे से,
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पुछा उससे-क्येा इतना दर्द दीया कमबख्त तूने ,तो हसकर बोली वो-मैं
जिंदगी हूं पगली तुझे जीना सिखा रही थी।