संभाल के रखना ईस तिरंगे को
अपने वतन का यह तोहफा है
पचहत्तर साल की आजादी का।
अब कोई मिट्टी किचड़ न लगे
अपनें ईस आज़ाद तिरंगे को
धुल न लगे बलीदान के रंगों को।
संभाल के घर में रखना तिरंगे को
जेसे रखतें हैं पुरखों की पुंजी को
बहुत क़ीमत चुकाई है इसे पाने को।
जमीं पर पड़ा तिरंगा मिले तुम को
उठा के सम्मान से रखना तिरंगे को
निभाना तुम अपने देश की गरीमा को।
सरम न करना इस नेक काम करने को
नर आखीर तुम भी अंग हो इस तिरंगे का
सो सो सलाम मेरे आज़ाद भारत को।
नाराणसी जाडेजा
नर
मुंद्रा कच्छ