आँखों के समुंदर में
कितनी मछली गहरी हैं
ये रंग बिरंगी मछली
आँखों की ये प्रहरी हैं
छलक-छलक उठती हैं जब तब
कभी बहकने लगती हैं
कभी सुनाती लोरी हमको
कभी सुबकने लगती हैं |
रात लगी है गहराने अब
सो जाओ मछली रानी
सुबह-सवेरे फिर उठ जाना
धन्यवाद दे,बन ज्ञानी !!
शुभ रात्रि स्नेहिल मित्रो
डॉ प्रणव भारती