शीर्षक : महफूज
महफूज नहीं है आजकल जिंदगी
आशियाने में भी डरती है जिंदगी
हवाओं में कुछ तो बह रहा ऐसा
जिसमें ख़ौफ़ दिख रहा मौत जैसा
कौन क्या ? अब ये नजर नहीं आ रहा
प्रश्नचिन्ह पूछ रहा आज कौन नहीं रहा ?
हर गली सूनी हो कर मातम मना रही
कल कौन ? खामोशी भी कँपकँपा रही
दौर योंही अगर ये ऐसे ही चलता रहा
वक्त कहेगा अब यहाँ इंसान कोई न रहा
"कमल" ये जिंदगी अब उम्र नहीं ढूंढ रही
कब्र के इंतजार में खुद का ताबूत खोज रही
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali