बिना कोशिश किये सफल होना चाहते हो?
शायद हो भी जाओ।
बिना परेशानी झेले सफर की मंज़िल चाहते हो?
शायद मिल भी जाये।
बिना अनुभव किये ही जीवन मे सब पाना चाहते हो?
शायद पा भी जाओ।
बिना कंधों पर ज़िम्मेदारी लिए महान बनना चाहते हो?
शायद बन भी जाओ।
बिना मेहनत किये जीत हासिल करना चाहते हो?
शायद जीत भी जाओ।
लेकिन एक बाद याद रखना दोस्त.....
जो घर बिना मजबूत नींव के कच्चे आधार पर बनते हैं ना
उसकी छत पर बोझ पड़ते ही घर भरभराकर गिर जाता है।
जितना कम समय और श्रम उस घर को बनाने में लगा था न,
उससे दुगना समय उस बिखरे घर को समेटकर फिर से खड़ा करने में लग जाता है।