“हादसा बनके कोई ख़्वाब बिगड़ जाए तो क्या हो, वक्त जज़्बात को तब्दील नही कर सकता।
दूर हो जाने से यह एहसास मर नहीं सकता, यह मोहब्बत है दिलों का रिश्ता।।
जो सरहदों में कभी तक्सीम नहीं हो सकता, तू किसी और की रातों का चांद ही सही।
मेरे हर रंग में सिर्फ तू शामिल है, तू किसी भी रास्ते गुजरे मेरी मंजिल तू है।।” – © जतिन त्यागी