तेरी अनार की सुनी कलाइयां
तेरी दी हुई असंख्य चूड़ियों के बिना, कलाइयां पड़ गई है सुनी और लगने लगी है श्याम;
तेरे प्यार बिना, तेरी हस्ती बिना, हैयाती बिना, यही तो होना था इनका अंजाम
पैमाना छलकते हुए लगता है दिलकश; बेजान लगता है जब नही होती है उसमे जाम ।
अब सुनी और बेजान इन कलाईयों का नहीं कोई दाम, नहीं कोई काम ।
इन सुनी कलाईयों को क्या दु मैं नाम, अब तो दर्द भरी आहें और आँसूंओ के साथ गुज़रती है हर शाम
Anar