हरि भक्ति (दोहा - छंद)
**************'*****
कुंज गली में खेलते, हरि ग्वालों के साथ।
सुन्दर छवि श्री कृष्णा की,जय हो गोकुल नाथ।।
वृंदावन की हर गली , करती यही पुकार।
दर्श कृष्ण का जो हुआ,जन्म हुआ साकार।।
हरि चरणों की दासी बनूं, जपूं कृष्ण का नाम।
हरि दर्शन की प्यास हैं, दर्शन दो घनश्याम।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित