गज़ल
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हम तो वही हैं बस अपनो ने रास्ते बदल दिए हैं,
जहा बहुत कदर थी वही बे-कदर मिले अपने ,
जिस रास्ते चलता था आज उसी रास्ते चल रहा हूं मैं,
आज अपनो ने सीखा दिया की ये रास्ता मेरा था ही नहीं,
जब जरूरत होती है तब बिना बोलके चले आते हैं,
अब जरूरत नहीं है तो मुंह फेर लेने से गभराते नहीं,
किया था हदसे ज्यादा जिस पर यकीन इस "शायर" ने,
आज वक्त हैं तो कोई बहाना बनाकर आते ही नहीं.!!!
शायर "हर्ष"