सभी माता भक्तों को दुर्गा अष्टमी पर्व की एवं शनिवार की शुभकामनाएं हनुमान जी एवं शनिदेव जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे...... शनिवार एवं दुर्गा अष्टमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से
नवरात्रि का पर्व चल रहा है.आज 09 अप्रैल 2022 को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है. आज का दिन नवरात्रि का आठवां दिन है. 10 अप्रैल को नवमी की तिथि है और 11 अप्रैल को नवरात्रि की दशमी तिथि है. जिसे विजया दशमी भी कहा जाता है. आगे की जानकारी एवं माता महागौरी के मंत्र कवच और विस्तृत विवरण.... ब्रह्मदत्त त्यागी
नवरात्रि में मां की सवारी का भी विशेष महत्व बताया गया है. इससे वर्ष की स्थिति का भी अंदाजा लगाया जाता है. इस बार नवरात्रि पर मां दुर्गा की आगमन सवारी घोड़ा थी.लेकिन मां का गमन महिष यानि भैंस की सवारी से हो रहा है. शास्त्रों के अनुसार जब मां भैंस पर सवार होकर विदा लेती हैं तो रोग और रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है. इसके साथ शोक, दुखों में भी वृद्धि होगी.
माता महागौरी का वाहन वृषभ है।
महागौरी माता का यह रूप बहुत ही शांत और मनोहारी है।
माँ महागौरी की पूजा करना बहुत ही शुभ और मंगल ग्रह है। माता-पिता के आँकड़ों को दूर करें। कार्यात्मक के रूप में महागौरी की देखभाल की प्रक्रिया से माँ दुर्गा की सभी तरह की पूजा का फल प्राप्त होता है।
राहू ग्रह पर महागौरी माता का प्रभाव है। इस जेंग से खेलने वाले ग्रह के व्यक्ति की स्थिति या तो मायागौरी माता आराधना करि होगी।
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
श्वेते वृष्समारुझा श्वेतांबरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोद:
या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपे स्थथिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सर्वस्कट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य शांतीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रमनम॥
सुखदात्री धन धान्य शांतिनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया आद्या महागौरी प्रमनम्यह
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्र्य्यरणीम्।
वदित चैतन्यमयी महागौरी प्रमनम्॥
ॐकारः पातुओ माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो होरो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ आँखम् घ्राणो।
कपोत चिबुकोफट पातु स्वाहा माँ सर्वदनो॥
पंचांग के अनुसार 11 अप्रैल 2022, सोमवार को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा. इसीदिन कलश विसर्जन किया जाएगा. नवरात्रि व्रत का पारण विधि पूवर्क करना चाहिए. नहीं तो इस व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होता है. मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्रि का पारणा चैत्र शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है. पारणा मुहूर्त को लेकर मतभेद भी दिखाई देते हैं, लेकिन मिमांस के अनुसार व्रत का पारण दशमी को करना चाहिए, क्योंकि कई शास्त्रों में नवमी पर उपवास रखने की बात कही गई है. इसलिए 11 अप्रैल को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा. पंचांग के अनुसार प्रात: 6 बजे के बाद पारण किया जा सकता है.
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़