0️⃣9️⃣0️⃣4️⃣2️⃣2️⃣ नौ अप्रैल दो हज़ार बाइस । शुक्रवार । शुभ समय ।वसंत ऋतु । आज "दुर्गाष्टमी पर्व" है ।
(१) समय बीत जाने के बाद कद्र की जाए तो वो कद्र नहीं अपितु अफ़सोस कहलाता है ।
(२) If you define the problem correctly, you have the solution.
(३) अभिमान को आने मत दो और स्वाभिमान को जाने मत दो क्योंकि अभिमान आपको उठने नहीं देगा और स्वाभिमान आपको गिरने नहीं देगा ।
(४) किस्मत और हालात, दोनों जब साथ न दें तो उनकी भी सुननी पड़ती है जिनकी कोई औकात नहीं होती ।
(५) नियत और सोच अच्छी होनी चाहिए बातें तो कोई भी अच्छी कर सकता है ।
(६) नींद के भी बड़े विचित्र नखरे हैं साहेब, जब आती है सब कुछ भुला देती है और न आए तो भूला हुआ भी याद करा देती है ।
(७) मजबूर और मज़बूत में ज्यादा फ़र्क नहीं है ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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