ठहर सा जाता हूं तुम्हारी आगोश में,
नहीं रहना मंजूर अब हमें होश में...
बेइंतहा से कम नहीं करना है इश्क़,
चाहों तो अपना बना तुम देख लो...
बेकरारी रहती है आपसे मिलन की,
अश्क आंखों से तुम बहां देख लो...
कितना आगोश में रहने तड़पता हूं,
एक लम्हा गले लगा तड़प देख लो...
पत्थर हूं पर पिघल जाऊंगा फिर भी,
शिद्दत से, होंठ से होंठ लगा देख लो...
उम्मीद है, आप भी महोब्बत करोगी,
दिन आखरी, कभी ना आऊंगा होश में...
-Feelings Academy