मां दुर्गा के प्रथम रूप
शैलपुत्री को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का
मां शैलपुत्री का स्वरूपः पार्वती और हेमवती इन्हीं के
नाम हैं। माँ का वाहन वृषभ है और इनके दाएँ हाथ में
त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का फूल है।
माँ शैलपुत्री का मंत्रः माँ शैलपुत्री की पूजा इस मंत्र के
उच्चारण से की जानी चाहिए-
शैलपुत्री ~मंत्र
shailputri-mantra.
ॐ देवी शैलपुत्र्यै स्वाहा
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
पूजा में उपयोगी वस्तुः मां भगवती की विशेष कृपा
प्राप्ति हेतु षोडशोपचार पूजन के बाद नियमानुसार
प्रतिपदा तिथि को नैवेद्य के रूप में गाय का घृत मां को
अर्पित करना चाहिए और फिर वह घृत ब्राह्मण को दे
देना चाहिए।
पूजा फलः मान्यता है कि माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक
पूजा करने से मनुष्य कभी रोगी नहीं होता।
जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की जय माता की.... जय माता दुर्गा शक्ति
आज से शुभ नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है ब्रह्मदत्त
त्यागी हापुड़ एवं सभी मां दुर्गा के भक्त, मां दुर्गा के सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हैं..... जय माता की जय माता दुर्गा शक्ति आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का
हिन्दू धर्म में माता दुर्गा अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ
नवदुर्गा कहा जाता है। नवदुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा
जाता है। हर देवी के अलग अलग वाहन हैं, अस्त्र शस्त्र हैं परंतु
यह सब एक हैं।
निम्नांकित श्लोक में नवदुर्गा के नाम क्रमश: दिये गए हैं--
आज मां दुर्गा का प्रथम रूप माता शैलपुत्री के रूप में स्थापित है ब्रह्मदत्त
OOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOO
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।
मां दुर्गा के नौ रूपों को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का
१- शैलपुत्री २-ब्रह्मचारिणी ३-चंद्रघंटा ४-कूष्मांडा ५-स्कंदमाता ६-कात्यायनी ७-कालरात्रि ८-महागौरी ९-सिद्धीदात्री
oooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooo