मैं बनारस की घाट,
तो तुम कलकल बहती गंगा की धारा बन जाना,
मैं तपती धूप,
तो तुम सुबह की ओस बन जाना,
तुम कभी ढलती शाम,
तो मैं चांदनी रात बन जाऊंगा,
कितने हसीन वो पल होंगे,
कभी तुम मैं बन जाना,
और कभी मैं तुम बन जाऊंगा,
एक दूजे का थामे हाथ,
तुम्हारा मैं हो जाना,
मेरा तुम हो जाना,
और फिर एक दूजे का हमसफर बन जाना.....