👁️फलसफा जिंदगी का👁️
जुनून सदा यही रहा हर पल सुनहरा रहा
कदम बहके तो जरा गिरने का डर रहा
ख्यालों में मंजिलो की चाहत का नशा रहा
हकीकत की दहलीज पर सदा अंधेरा रहा
गुमाँ था सब अपनें, पर परायापन झलकता रहा
चेहरे पर मुस्कान का सूर्य उदय-अस्त होता रहा
बैचेनियों में सर्द-यादों का सिलसिला जारी रहा
रह-गुजर सी जिंदगी का सफर बेफिक्र जारी रहा
अँदाज उल्फत ए दास्ताँ जिंदगी क्यों बया करे
प्रेयसी साँसों की उसकी बेफिक्री का ख्याल करे
फलसफा यही जिंदगी कुछ नहीं एक ख्याल है
शक होता जिस्म से बंधी साँसों की गहरी चाल है
✍️ कमल भंसाली