रणभूमि
राणा का घोड़ा चेतक था प्रलय के समान।
एक इशारे पर दे देता प्राण।
इस माटी में कई रक्त मिले है।
महज इंसान ही नही बेजुबान भी भक्त मिले है।
सिंहासन की सोभा बनी देवियां तमाम।
जोहर उदाहरण है अर्पण थे प्राण।
अपनी आन के खातिर प्राण गवाया।
खिलजी का बच्चा उन्हें छू भी न पाया।
थी वो पवित्र आत्मा पवित्र रह गई।
अग्नि सम थी पावन अग्नि संग चली गई।
एक थे वे जो की मर्यादा में ही रहे।
विपदा कोई भी आए आंधी कोई चले
जिसको जिसको तारा किया उन्हें प्रणाम।
राणा का घोड़ा .......