कितनी दूर है आप !
याद आती है आपकी !
याद आता है,
मेरी मस्ती और मेरे नखरों पर,
आपका मेरा कान खींच कर डांटना।
याद आता है,
मुज पर आपका गर्व से हक जताना।
याद आता है,
मेरी छोटी धीमी सांस चलने पर,
आपका होले से "क्या हुआ ?" पूछना।
रोज जब में निकलता हूं काम पर,
सुनाई देता है ना आपको मेरा "जा रहा हूं !"?
आपकी याद आती है,
इसका कोई जब जवाब नहीं आता।
याद आता है,
आपका मेरे खाने की फिकर करना।
याद आता है,
हालात से मुंह की खाने के बाद,
आपका मुझको अपने आंचल में संभाल लेना।
याद आता है,
घबरा के नींद से जागू तो,
आपका मुस्काता चेहरा।
याद आता है,
नींद न आए मुझे तो,
मेरा शिर सहलाता हुआ आपका हाथ।
याद आती है,
अब तो कानो को भी,
आपकी हल्की सी लॉरी।
याद आती है,
अकेलेपन के दरिया में,
आपके अपनेपन के ऐहसास की।
केसे बताऊं ? की याद आती है।
केसे बताऊं में की, आपका शेर बच्चा तो हूं,
पर, आपका लाल होना है मुझे !
केसे बताऊं ? केसे कहूं ?
कितना कुछ है मां !
याद आती है आपकी !