*स्वयं की क्षमता से कहीं अधिक अपनी*
*आकांक्षाओ को पूरा कर पाने में*
*असमर्थ रहने पर जब हमारे मन*
*में निराशा उत्पन्न होने लगे तो*
*समझदारी इसी में है कि कुछ*
*समय के लिए शान्त होकर बैठ जाएं,*
*और विचार करें कि हमसे कहाँ ग़लती*
*हुई है...!*
*विश्वास रखिये आपका शांत मन आपको*
*एकदम सही राह दिखायेगा!*
*सुप्रभात*